10 दिसंबर 2012 - 20:30

अमरीका और ब्रिटेन ने सीरियाई सरकार के विरुद्ध लड़ रहे विद्रोहियों को सैन्य सहायता पहुंचाने का निर्णय लिया है। ब्रितानी समाचार पत्र इंडिपेन्डेंट द्वारा सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में आया है कि ब्रितानी सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख जनरल सर डेविड रिचर्ड्स की कुछ सप्ताह पूर्व लंदन में फ़्रांस, तुर्की, क़तर, जार्डन,संयुक्त अरब इमारात और अमरीकी सैन्य अधिकारियों के साथ गुप्त बैठक हुयी.......

अमरीका और ब्रिटेन ने सीरियाई सरकार के विरुद्ध लड़ रहे विद्रोहियों को सैन्य सहायता पहुंचाने का निर्णय लिया है।ब्रितानी समाचार पत्र इंडिपेन्डेंट द्वारा सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में आया है कि ब्रितानी सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख जनरल सर डेविड रिचर्ड्स की कुछ सप्ताह पूर्व लंदन में फ़्रांस, तुर्की, क़तर, जार्डन,संयुक्त अरब इमारात और अमरीकी सैन्य अधिकारियों के साथ गुप्त बैठक हुयी।इस रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के कई सरकारी विभागों के अधिकारियों ने अपने घटक देशों के समकक्षों के साथ इसी प्रकार की बैठकें की जिसमें संकटग्रस्त सीरिया में विदेश समर्थित विद्रोहियों की सहायता की स्ट्रेटिजी की समीक्षा की गयी।ये बैठकें ब्रितानी प्रधान मंत्री डेविड कैमरन के आवेदन पर आयोजित हुयी जिन्होंने अभी हाल में सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद की सरकार को कमज़ोर करने के लिए और प्रयासों की बात कही।     इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने यह प्रतिबद्धता दर्शाई है कि वे सीरिया में सेना भेजने या ज़मीनी कार्यवाही नहीं करेंगे किन्तु ट्रेनिंग कैंप के तुर्की में स्थापित करने की योजना है जहां वे सीरियाई सीमा के निकट विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे सकेंगे।सीरियाई सरकार का कहना है कि उनके देश में अशांति का षड्यंत्र विदेश द्वारा रचा गया है और इस बात की रिपोर्टें आ रही हैं कि सीरिया में इस समय दमिश्क़ सरकार से लड़ रहे विद्रोहियों में अधिकांश विदेशी आतंकवादी हैं जिनमें मुख्य रूप से मिस्र, अलजीरिया, सउदी अरब और अफ़ग़ानिस्तान से आए हुए आतंकवादी हैं।ज्ञात रहे सीरिया की समस्या के संबंध में 30 जून को जनेवा बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और सीरिया के पड़ोसी देश सीरिया में एक ऐसी ट्रान्ज़िशनल सरकार के गठन पर सहमत हुए थे जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व हो किन्तु जुलाई के आरंभ में पेरिस में सीरिया के तथाकथित मित्र देशों की बैठक में ये देश जनेवा बैठक की सहमति से पीछे हट गए और बश्शार असद से सत्ता से हटने की ज़िद्द करने लगे। रूस और चीन पश्चिम की बश्शार असद से सत्ता से हटने की मांग के मुखर विरोधी हैं।रूस जनेवा सहमति के आधार पर सीरिया की समस्या के राजनैतिक समाधान पर बल देता है।...........166